स्कूल दिखाने पर पाबंदी

 स्कूल दिखाने पर पाबंदी? विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। स्कूलों के निरीक्षण और उन्हें दिखाए जाने को लेकर उठे सवालों के बीच विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के कार्यकाल का हवाला देते हुए मौजूदा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

विपक्ष की ओर से तंज कसते हुए कहा गया कि एक दौर में केजरीवाल और सिसोदिया लोगों से कहते थे—“आइए, हमारे स्कूल देखिए।”वहीं, मौजूदा व्यवस्था में स्कूलों को दिखाने और निरीक्षण को लेकर पाबंदियां लगाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।विपक्ष का कहना है कि सरकारी स्कूल जनता के पैसे से संचालित होते हैं और उनकी व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। ऐसे में यदि स्कूलों का निरीक्षण करने या उनकी वास्तविक स्थिति देखने पर रोक लगाई जाती है, तो इससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्ष इसे “पारदर्शिता बनाम पाबंदी” का मुद्दा बता रहा है, जबकि सरकार की ओर से इस संबंध में अलग पक्ष या प्रशासनिक कारण सामने आना बाकी है।

अब सवाल यही है कि सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर उठ रहे इन सवालों का जवाब सरकार किस तरह देती है और क्या स्कूलों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखने के लिए निरीक्षण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।

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